“हर बालिका राष्ट्र की पूंजी” थीम पर मनाया गया प्रेरणादायक आयोजन
“बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ” अभियान के तहत बालिकाओं ने कहानी लेखन के माध्यम से साझा किए अपने सपनों के विचार
एमसीबी/07 नवम्बर 2025/
बाल दिवस के अवसर पर आज शासकीय कन्या उच्चतर माध्यमिक विद्यालय (ई-संवर्ग), मनेन्द्रगढ़ में “बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ” अभियान के तहत एक प्रेरणादायक और सृजनात्मक कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस वर्ष कार्यक्रम की थीम “हर बालिका राष्ट्र की पूंजी” रखी गई, जिसमें बालिकाओं ने अपने उज्ज्वल भविष्य की कल्पनाओं और सपनों को कहानी लेखन प्रतियोगिता के माध्यम से अभिव्यक्त किया। प्रतियोगिता का विषय “मेरे सपनों का भविष्य” निर्धारित किया गया था।

यह आयोजन जिला दंडाधिकारी एवं कलेक्टर श्री डी. राहुल वेंकट के निर्देशानुसार तथा जिला कार्यक्रम अधिकारी श्री आर.के. खाती के मार्गदर्शन में संपन्न हुआ। कार्यक्रम का संचालन मिशन शक्ति हब की जिला मिशन समन्वयक श्रीमती तारा कुशवाहा द्वारा किया गया, जिन्होंने बालिकाओं को आत्मविश्वास और सशक्तिकरण का संदेश दिया।

बालिकाओं ने रचनात्मकता से सजाया भविष्य का सपना
कार्यक्रम के दौरान बालिकाओं ने पूरे उत्साह और आत्मविश्वास के साथ अपनी कहानियाँ प्रस्तुत कीं। उनकी रचनाओं में शिक्षा, समान अवसर, आत्मनिर्भरता और सशक्त भारत की झलक देखने को मिली। प्रत्येक कहानी में बेटियों के भीतर छिपे सपनों और उनके उज्जवल भविष्य की झिलमिलाहट महसूस की जा सकती थी।
विद्यालय की प्राचार्य श्रीमती अर्चना वैष्णव ने कार्यक्रम में छात्राओं को प्रोत्साहित करते हुए कहा कि –
> “हर बालिका अपने अंदर असीम संभावनाएँ लिए हुए है, बस उन्हें पहचानने और दिशा देने की आवश्यकता है।”
कार्यक्रम में महिला एवं बाल विकास विभाग की जेंडर विशेषज्ञ सुश्री शैलजा गुप्ता, वित्तीय साक्षरता समन्वयक श्रीमती अनीता कुमारी शाह, तथा सखी वन स्टॉप सेंटर की केंद्र प्रशासक श्रीमती प्रियंका राजवाड़े की विशेष उपस्थिति ने आयोजन को और भी प्रभावशाली बना दिया।

बाल सशक्तिकरण की दिशा में प्रेरक पहल
निर्णायक मंडल ने छात्राओं की कहानियों का मूल्यांकन करते हुए उत्कृष्ट प्रतिभागियों का चयन किया और उन्हें प्रोत्साहित किया। विजेता बालिकाओं को पुरस्कार और प्रमाणपत्र प्रदान किए गए।
जिला मिशन समन्वयक श्रीमती तारा कुशवाहा ने कहा कि इस तरह के कार्यक्रम बालिकाओं के आत्मविश्वास को मजबूत करते हैं और उन्हें अपने सपनों को साकार करने के लिए प्रेरित करते हैं। उन्होंने बताया कि ऐसे आयोजन जिले के अन्य विद्यालयों में भी किए जाएंगे, ताकि अधिक से अधिक बालिकाओं तक सशक्तिकरण का संदेश पहुँच सके।
उत्साह, सृजन और आत्मविश्वास का संगम
बाल दिवस के इस अवसर पर विद्यालय परिसर उत्साह, उल्लास और सृजनात्मक ऊर्जा से भर गया। प्रत्येक बालिका के चेहरे पर आत्मविश्वास और अपने भविष्य को लेकर दृढ़ विश्वास झलक रहा था।
इस आयोजन ने यह सशक्त संदेश दिया कि –
> “हर बालिका केवल एक परिवार की नहीं, बल्कि राष्ट्र की अमूल्य पूंजी है।”
कार्यक्रम के अंत में सभी अतिथियों और प्रतिभागी छात्राओं ने “बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ” अभियान को आगे बढ़ाने और समाज में बेटियों के सम्मान व सुरक्षा की दिशा में योगदान देने का संकल्प लिया।
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