विभागीय अधिकारी का अहंकार चरम पर: पत्नी के पद का हवाला देकर अधीनस्थों पर धौंस,
कलेक्टर से भी बड़ा पद अपना मानते हैं, महिला कर्मचारियों के प्रति असंवेदनशील रवैया
छत्तीसगढ़
एक विभाग के वरिष्ठ अधिकारी द्वारा अपने पद और पारिवारिक प्रभाव का दुरुपयोग करने के गंभीर आरोप सामने आए हैं। बताया जा रहा है कि यह अधिकारी अपनी पत्नी के उच्च पद का हवाला देकर अधीनस्थ कर्मचारियों पर रौब झाड़ते हैं और ऐसा बर्ताव करते हैं मानो वे विभाग नहीं, किसी निजी साम्राज्य का संचालन कर रहे हों।
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तानाशाही जैसा व्यवहार, ‘5 मिनट का टाइम’ की भाषा
सूत्रों के अनुसार, यह अधिकारी अधीनस्थों को निर्देश देते समय “5 मिनट का टाइम” जैसी भाषा का प्रयोग करते हैं, जैसे कोई वीडियो गेम खेल रहे हों। यह रवैया न केवल असंवेदनशील है बल्कि कार्यालयीन गरिमा और सरकारी सेवा आचरण नियमों का खुला उल्लंघन है।
महिला कर्मचारियों के अधिकारों की अनदेखी
सबसे गंभीर आरोप यह है कि अधिकारी महिलाओं के मामलों में संवेदनशीलता बरतने के बजाय उन्हें उनके अधिकारों से वंचित करने की कोशिश करते हैं। कई महिला कर्मचारी मानसिक तनाव और असहज माहौल में काम करने को मजबूर हैं।
कार्यालयीन समय के बाद मिलने का दबाव
जानकारी के मुताबिक, अधिकारी कर्मचारियों से कहते हैं कि किसी भी विषय पर चर्चा कार्यालय समय के बाद ही हो। यह निर्देश स्पष्ट रूप से कार्यस्थल की पारदर्शिता और सरकारी कार्यप्रणाली के नियमों के खिलाफ है।
अधीनस्थ भी घेरे में
इस पूरे मामले में अधिकारी के कुछ खास अधीनस्थ भी शामिल बताए जा रहे हैं, जो उनके इस रवैये में सहयोग कर रहे हैं। सूत्र बताते हैं कि मामले की शिकायत जल्द ही उच्च अधिकारियों तक पहुँच सकती है, और इसमें शामिल सभी पर कार्रवाई की मांग उठ सकती है।
जिले के कलेक्टर से भी बड़ा बनने की मानसिकता
स्थानीय कर्मचारियों का कहना है कि जिले के कलेक्टर तक जनता से सहजता से मिलते हैं, जबकि यह अधिकारी अपने आप को कलेक्टर से भी बड़ा समझते हैं। यह अहंकारी रवैया विभागीय अनुशासन और छवि को गहरी चोट पहुँचा रहा है।
प्रशासन को तत्काल हस्तक्षेप करना चाहिए
यदि समय रहते प्रशासन ने इस पर कठोर कदम नहीं उठाए, तो इससे न केवल कर्मचारियों का मनोबल गिरेगा, बल्कि विभाग की साख भी धूमिल होगी।
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