रेत माफिया बेखौफ: एनजीटी के नियमों की खुलेआम धज्जियां, प्रशासन की चुप्पी पर सवाल
केल्हारी पसौरी (एमसीबी)।
केल्हारी से महज कुछ किलोमीटर दूर ग्राम पंचायत पसौरी क्षेत्र में बहने वाली नदी में अवैध रेत उत्खनन का खेल बेखौफ जारी है। मशीनों से दिनदहाड़े नदी का सीना चीरकर रेत निकाली जा रही है। यह नदी छत्तीसगढ़ और मध्य प्रदेश की अंतरराज्यीय सीमा बनाती है—एक किनारा छत्तीसगढ़ में तो दूसरा मध्य प्रदेश में—जिसका फायदा उठाकर रेत माफिया खुलेआम कानून को ठेंगा दिखा रहे हैं।
सूत्रों के अनुसार, भारी मात्रा में रेत निकालकर उसे मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश में ऊंचे दामों पर खपाया जा रहा है। रेत परिवहन को सुगम बनाने के लिए नदी किनारे अवैध रास्तों का निर्माण तक कर दिया गया है। सबसे गंभीर बात यह है कि नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) के स्पष्ट दिशा-निर्देशों की अनदेखी करते हुए नदी के भीतर मशीनों से उत्खनन किया जा रहा है, जो पूरी तरह प्रतिबंधित है।
कुछ दिन पूर्व खनिज विभाग ने कार्रवाई कर मशीन जब्त की थी, लेकिन महज दस दिन के भीतर ही माफिया फिर सक्रिय हो गए। इससे प्रशासनिक कार्रवाई की गंभीरता और प्रभावशीलता पर सवाल खड़े हो रहे हैं। ग्रामीणों द्वारा विरोध जताने के बावजूद अवैध उत्खनन पर ठोस रोक नहीं लग पाई है।

प्रशासन मौन क्यों?
तहसील केल्हारी अंतर्गत पसौरी क्षेत्र में खुलेआम चल रहे इस अवैध कारोबार पर अंकुश लगाने में प्रशासन अब तक असफल क्यों है? क्या माफियाओं को किसी का संरक्षण प्राप्त है, या फिर जिम्मेदार अधिकारी जानबूझकर आंखें मूंदे हुए हैं?
अब देखना यह है कि प्रशासन इस गंभीर मामले में कब तक चुप्पी साधे रहता है या फिर अवैध रेत माफिया पर कड़ी कार्रवाई कर कानून का राज स्थापित करता है।
![]()
