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कन्या छात्रावास रिपेयरिंग में गुणवत्ता पर सवाल, भ्रष्टाचार की आशंका
आदिम जाति कल्याण विभाग के अधीन कार्य पर उठे सवाल
मनेंद्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर (MCB), 20 अगस्त।
जिले के मनेंद्रगढ़ स्थित प्री मेट्रिक कन्या आदिवासी छात्रावास में चल रहे रिपेयरिंग कार्य की गुणवत्ता पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं

तार फेंसिंग के लिए लगाई जा रही लोहे की एंगल मात्र लगभग 2 फीट लंबी और करीब 1 इंच चौड़ी है, जबकि मजबूती के लिए एंगल का कम-से-कम 1 फुट दीवार के भीतर गड़ा होना और 2 से 3 इंच चौड़ाई की एंगल लगना चाहिए। फेंसिंग टिकाऊ नहीं रहेगी और सुरक्षा पर सीधा असर पड़ेगा।

बात सिर्फ फेंसिंग तक सीमित नहीं हैं। दीवारों की रिपेयरिंग में उपयोग हो रहे मसाले (मोर्टार) और प्लास्टर को भी घटिया है। प्लास्टर की परत असामान्य है और गुणवत्ता मानकों के अनुरूप कार्य दिखाई नहीं दे रहा।
छात्रावास जैसी संवेदनशील इमारत में इस तरह की लापरवाही से छात्राओं की सुरक्षा और भवन की दीर्घकालिक मजबूती पर प्रश्नचिह्न लग रहा है।
लाल ईट का प्रयोग
शासकीय विभागों द्वारा किए जा रहे निर्माण कार्यों में लाल ईंट (रेड ब्रिक) का उपयोग प्रतिबंधित है। इसके स्थान पर सरकार ने फ्लाई ऐश ईंट (Fly Ash Bricks) के उपयोग को अनिवार्य किया है, ताकि पर्यावरण संरक्षण के साथ-साथ निर्माण कार्यों की गुणवत्ता भी बनी रहे।
लेकिन आश्चर्य की बात यह है कि नियमों की अनदेखी करते हुए कई शासकीय निर्माण कार्यों में आज भी लाल ईंट का उपयोग किया जा रहा है।
निगरानी पर प्रश्न:
कार्य की तकनीकी निगरानी और साइट सुपरविजन को लेकर विभागीय जिम्मेदारियों पर भी सवाल उठे। क्या ठेकेदार द्वारा घटिया कार्य को विभाग द्वारा नजरअंदाज किया जा रहा है?
विभागीय जिम्मेदारी
यह रिपेयरिंग कार्य आदिम जाति कल्याण विभाग, MCB के तहत कराया जा रहा है। विभाग से गुणवत्ता की जांच, कार्यस्थल का संयुक्त निरीक्षण और जिम्मेदारों पर कार्रवाई हो, छात्रावास में सुरक्षा सर्वोपरि है, इसलिए कमज़ोर फेंसिंग और घटिया मरम्मत नहीं होना चाहिए है।
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