जनप्रतिनिधियों का अपमान, लोकतंत्र पर आघात!
DFO मनीष कश्यप पर अभद्रता का आरोप, जनप्रतिनिधियों ने किया जबरदस्त विरोध
मनेंद्रगढ़, छत्तीसगढ़।
राज्य सरकार की नाक के नीचे जनप्रतिनिधियों के सम्मान को जिस तरह से रौंदा गया, उसने न केवल प्रशासनिक मर्यादाओं को तार-तार किया, बल्कि यह भी दर्शा दिया कि कुछ अधिकारी सत्ता के घमंड में जनता के नुमाइंदों को भी अपमानित करने से नहीं चूकते।
गुरुवार को नगर पालिका अध्यक्ष प्रतिमा यादव, उपाध्यक्ष, 22 पार्षदगण और विधायक प्रतिनिधि जब मनेंद्रगढ़ वन मंडलाधिकारी (DFO) मनीष कश्यप से क्षेत्र में लगातार हो रहे भालुओं के विचरण पर चर्चा के लिए पहुंचे, तब स्थिति उस वक्त विस्फोटक हो गई जब DFO ने ना सिर्फ़ महिला पार्षदों को चैंबर से बाहर कर दिया, बल्कि अध्यक्ष-उपाध्यक्ष को भी अपमानजनक भाषा में बाहर निकाल दिया।
अधिकारियों का रवैया जनप्रतिनिधियों के सम्मान पर सीधा हमला
जनहित के गंभीर मुद्दे पर पहुंचे प्रतिनिधियों के साथ जिस प्रकार की अभद्रता की गई, वह अस्वीकार्य है। पांच महिला पार्षदों को चैंबर के बाहर बैठाना, फिर अध्यक्ष प्रतिमा यादव और उपाध्यक्ष को धक्के देकर बाहर निकाल देना—यह न केवल लोकतंत्र की गरिमा को चोट पहुंचाने वाला है, बल्कि सत्ता के मद में चूर प्रशासनिक मनोवृत्ति का भी प्रमाण है।
स्वास्थ्य मंत्री को सौंपा गया ज्ञापन, और सामूहिक इस्तीफा की गई कड़ी कार्रवाई की मांग
घटनाक्रम के बाद नगर पालिका अध्यक्ष प्रतिमा यादव ने स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल को संयुक्त हस्ताक्षरीत पत्र सौंपा। पत्र में DFO के रवैये को ‘घोर अपमानजनक’ बताया गया है और तत्काल उच्च स्तरीय जांच की मांग की गई है। उन्होंने कहा कि अगर अब भी कार्रवाई नहीं होती, तो जनप्रतिनिधियों के सम्मान का क्या अर्थ रह जाएगा?

नगर पालिका के सभी पार्षदों के द्वारा स्वास्थ्य मंत्री को एक पत्र लिखकर सामूहिक रूप से इस्तीफा भी दिया गया।
DFO के व्यवहार पर मचा हंगामा, कार्यालय के बाहर हुआ विरोध प्रदर्शन
घटना के बाद महिला पार्षदों और अन्य प्रतिनिधियों ने वन विभाग कार्यालय के बाहर जोरदार नारेबाजी शुरू कर दी। “जनप्रतिनिधियों का अपमान नहीं सहेगा हिंदुस्तान” जैसे नारों से वातावरण गूंज उठा। भाजपा और कांग्रेस दोनों दलों के नेता मौके पर पहुंचकर विरोध प्रदर्शन में शामिल हो गए। वन विभाग कार्यालय कुछ देर के लिए रणक्षेत्र बन गया।

पूर्व विधायक गुलाब कमरों ने सरकार पर साधा निशाना
पूर्व विधायक गुलाब कमरों ने तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा—
> “यह बेहद शर्मनाक है। एक DFO किस अधिकार से निर्वाचित जनप्रतिनिधियों को इस तरह से अपमानित करता है? यह केवल एक अधिकारी की उद्दंडता नहीं, बल्कि लोकतंत्र की बुनियाद पर हमला है।”
उन्होंने चेतावनी दी कि यदि अधिकारी पर तत्काल कार्रवाई नहीं की गई, तो जनआक्रोश और अधिक तीव्र हो सकता है।
पत्रकारों से भी किया गया दुर्व्यवहार
कार्यालय में पत्रकारों से भी दुर्व्यवहार किया गया जिस पर पत्रकारों ने भी धरना दिया

पहले भी हो चुकी हैं शिकायतें, लेकिन मिला संरक्षण
गुलाब कमरों ने यह भी बताया कि DFO मनीष कश्यप के खिलाफ पहले भी व्यवहार और कार्यप्रणाली को लेकर शिकायतें की गई थीं, लेकिन हर बार उन्हें सत्ता पक्ष का संरक्षण प्राप्त रहा, जिसके चलते कोई कार्रवाई नहीं हो सकी।
क्या प्रशासन देगा जनता को जवाब?
अब सबसे बड़ा सवाल यह है—क्या सरकार इस घटना को गंभीरता से लेगी? क्या लोकतंत्र में चुने गए जनप्रतिनिधियों का यह अपमान बर्दाश्त किया जाएगा? यदि दोषियों पर कठोर कार्रवाई नहीं होती, तो यह एक खतरनाक परंपरा की शुरुआत होगी जिसमें अधिकारी निर्वाचित प्रतिनिधियों से भी ऊपर समझने लगेंगे।
मामले का समाधान: बैठक में DFO ने खेद जताया
विवाद के बढ़ते स्वरूप को देखते हुए पूर्व विधायक गुलाब कमरों, विधायक रेणुका सिंह और अन्य जनप्रतिनिधि वन मंडल कार्यालय पहुंचे। लगभग 22 पार्षदों और अधिकारियों की मौजूदगी में DFO मनीष कश्यप ने अंततः खेद प्रकट किया और आश्वासन दिया कि भविष्य में ऐसी घटनाएं दोबारा नहीं होंगी।
केवल खेद नहीं, अब ज़रूरत है अनुशासनात्मक कार्रवाई की
DFO द्वारा खेद प्रकट करना केवल क्षणिक समाधान हो सकता है, लेकिन जनप्रतिनिधियों की गरिमा की पुनर्स्थापना के लिए यह आवश्यक है कि दोषी अधिकारियों के खिलाफ सख्त अनुशासनात्मक कदम उठाए जाएं। नहीं तो “लोकतंत्र” सिर्फ़ एक शब्द बनकर रह जाएगा, उसका अर्थ खो जाएगा।
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