शिक्षा के क्षेत्र में नवाचार की मिसाल बनीं मीना जायसवाल, राज्यपाल के हाथों सम्मानित
रायपुर।
शिक्षक दिवस के अवसर पर राजधानी रायपुर स्थित राजभवन में आयोजित शिक्षक सम्मान समारोह में छत्तीसगढ़ के चयनित उत्कृष्ट शिक्षकों को राज्यपाल के हाथों सम्मानित किया गया। इस गरिमामयी अवसर पर मनेंद्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर जिले के प्राथमिक शाला शंकरगढ़, विकासखंड मनेंद्रगढ़ की प्रधानपाठिका श्रीमती मीना जायसवाल को शिक्षा के क्षेत्र में उनके उल्लेखनीय योगदान के लिए राज्यपाल पुरस्कार से नवाजा गया।
श्रीमती मीना जायसवाल लंबे समय से शिक्षा जगत में अपने नवाचारों, रचनात्मक गतिविधियों और बच्चों के सर्वांगीण विकास के लिए किए जा रहे प्रयासों के लिए जानी जाती हैं। उन्होंने शिक्षा को केवल किताबों तक सीमित न रखते हुए बच्चों को रोचक और व्यावहारिक ढंग से सिखाने की अनूठी पहल की है। यही कारण है कि वे बच्चों की प्रिय शिक्षिका के रूप में जानी जाती हैं।
नवाचार और गतिविधियों से बच्चों को बना रहीं आत्मनिर्भर
मीना जायसवाल ने अपने विद्यालय में साहित्यिक, सांस्कृतिक और रचनात्मक कार्यक्रमों का लगातार आयोजन कर बच्चों को आत्मविश्वासी बनाने की दिशा में विशेष योगदान दिया है। कबाड़ से जुगाड़ जैसी गतिविधियों के माध्यम से उन्होंने बच्चों में रचनात्मकता और संसाधनों के बेहतर उपयोग की समझ विकसित की है।
उनके प्रयासों को कई स्तरों पर सराहना मिली है। वे पहले भी मुख्यमंत्री शिक्षा गौरव सम्मान, अरविंदो सोसायटी का राष्ट्रीय सम्मान, राष्ट्रीय नवाचारी शिक्षा रत्न सम्मान, महिला सशक्तिकरण सम्मान समेत कई बड़े पुरस्कारों से सम्मानित हो चुकी हैं।
मार्गदर्शकों को दिया श्रेय
सम्मान प्राप्त करने के बाद भावुक शब्दों में मीना जायसवाल ने कहा –
“शिक्षा के क्षेत्र में मेरी उपलब्धियों का श्रेय मेरे मार्गदर्शक डॉ. सपन सिन्हा सर को जाता है, जिनकी प्रेरणा और मार्गदर्शन से मैं बच्चों तक नवाचार और गतिविधियों को रोचक ढंग से पहुंचा पा रही हूं। आज जो भी स्थान मैंने बनाया है, उसका श्रेय मेरे पिता तुल्य डॉ. सपन सिन्हा सर, बड़े भाई समान श्री रुद्र प्रताप राणा सर, अशफ़ाक सर और मेरे शिक्षक साथी श्रीमती मंजू पैकरा व श्रीमती अर्पणा मिंज को जाता है।”
शिक्षा जगत में बढ़ी जिले की पहचान
मीना जायसवाल को राज्यपाल के हाथों मिला यह सम्मान न केवल उनके व्यक्तिगत कार्यों की सराहना है, बल्कि यह मनेंद्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर जिले के लिए भी गौरव का क्षण है। उनके कार्यों से प्रेरणा लेकर जिले के अन्य शिक्षक भी शिक्षा के क्षेत्र में नवाचार और गुणवत्ता सुधार की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं।
यह सम्मान इस बात का प्रमाण है कि समर्पण और नवाचार से शिक्षा के क्षेत्र में नई ऊंचाइयां हासिल की जा सकती हैं।
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