- मिलनपाथरा चेकपोस्ट पर लगाया गया हाईटेक CCTV सिस्टम झोपड़ी में रखा मिलने से आबकारी विभाग पर उठे सवाल —
MCB मनेन्द्रगढ़।
आबकारी विभाग द्वारा अवैध शराब परिवहन पर निगरानी बढ़ाने के लिए मिलनपाथरा चेकपोस्ट पर हाल ही में लगाया गया सीसीटीवी कैमरा सिस्टम अब सवालों के घेरे में है। रविवार सुबह विभाग ने कैमरा और रिकॉर्डिंग यूनिट इंस्टॉल किए जाने की औपचारिकता पूरी की, लेकिन स्थानीय लोगों और वाहन चालकों ने गंभीर आरोप लगाते हुए कहा है कि रिकॉर्डिंग सिस्टम को उचित, सुरक्षित भवन के बजाय एक झोपड़ी जैसी अस्थायी संरचना में रखा गया है।
इस व्यवस्था से निगरानी की प्रभावशीलता और पारदर्शिता पर बड़ा प्रश्नचिह्न लग गया है।
क्या है पूरा मामला
सूत्रों के अनुसार आबकारी विभाग ने चेकपोस्ट पर सीसीटीवी कैमरे तो लगाए हैं, पर कैमरों की रिकॉर्डिंग यूनिट को झोपड़ीनुमा ढांचे में रख दिया गया है। न तो वहां सुरक्षा की पुख्ता व्यवस्था है, न ही बिजली और नेटवर्क की स्थायी सुविधा। इससे यह आशंका जताई जा रही है कि थोड़ी सी तकनीकी खराबी या मानवीय हस्तक्षेप से पूरा सिस्टम निष्क्रिय हो सकता है।
कुछ प्रबुद्ध जनों ने इस व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए कहा है कि यदि निगरानी प्रणाली ही असुरक्षित है तो कैमरे लगाने का उद्देश्य ही अधूरा रह जाएगा।
स्थानीयों की प्रतिक्रिया
> “कैमरा तो दिख रहा है, पर सिस्टम झोपड़ी में रखा है। इससे न तो रिकॉर्डिंग की सुरक्षा की गारंटी है और न पारदर्शिता की। कागज़ों में कुछ और ज़मीन पर कुछ और है।”
दूसरे स्थानीय ने कहा
> “यह चेकपोस्ट पहले भी सुर्खियों में रहा है। अगर रिकॉर्डिंग सिस्टम असुरक्षित जगह पर रखा गया है तो यह व्यवस्था सिर्फ़ दिखावा है, वास्तविक निगरानी नहीं।”
प्रशासनिक और कानूनी पहलू
विधिक विशेषज्ञों का कहना है कि सरकारी परियोजनाओं में लगाए गए उपकरणों और सिस्टम की सुरक्षा सुनिश्चित करना संबंधित विभाग की जिम्मेदारी होती है। यदि कोई रिकॉर्डिंग यूनिट असुरक्षित या अनुपयुक्त स्थान पर रखी जाती है तो यह सार्वजनिक धन के दुरुपयोग की श्रेणी में आ सकता है।
कानूनी रूप से विभागीय नियमों के तहत अधिकारी की जवाबदेही तय की जा सकती है। ऐसी स्थिति में जांच कराई जानी चाहिए कि क्या इंस्टॉलेशन प्रक्रिया तकनीकी मानकों और सुरक्षा प्रोटोकॉल का पालन करते हुए की गई थी या नहीं।
विभाग से जवाबदेही की मांग
सिस्टम की सुरक्षा, निगरानी और रखरखाव की व्यवस्था स्पष्ट की जाए।
और सबसे अहम — सार्वजनिक धन से लगाए गए उपकरणों का उपयोग पारदर्शी रूप से हो, ताकि जनता का विश्वास बना रहे।
सवाल बरकरार: क्या अब भी मनेन्द्रगढ़ सुरक्षित है?
लोगों का कहना है कि अगर सीसीटीवी सिस्टम ही झोपड़ी में रखे जाएंगे, तो अवैध शराब परिवहन पर लगाम लगने की उम्मीद कैसे की जा सकती है?
अब निगाहें प्रशासन और आबकारी विभाग पर हैं — क्या वे इस सवाल का जवाब देंगे, या यह मामला भी “औपचारिकता” बनकर रह जाएगा?
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