“शहर के अस्तित्व की जंग — चिरमिरी वासियों को पट्टा दिलाने कलेक्टर जनदर्शन पहुँचे पूर्व महापौर के. डोमरु रेड्डी”
मनेंद्रगढ़/चिरमिरी।
चिरमिरी शहर के लोगों को आवासीय पट्टा दिलाने की लंबित कार्यवाही को आगे बढ़ाने की मांग को लेकर, नगर निगम चिरमिरी के पूर्व महापौर एवं जिला कांग्रेस उपाध्यक्ष के. डोमरु रेड्डी ने एक बार फिर कलेक्टर जनदर्शन में पहुँचकर प्रशासन से गुहार लगाई है। रेड्डी ने अपर कलेक्टर अनिल सिदार से मुलाकात कर कलेक्टर डी. वेंकट राहुल के नाम विस्तृत ज्ञापन सौंपते हुए चिरमिरी वासियों के वर्षों पुराने घरों एवं दुकानों के मालिकाना हक की मांग दोहराई।

महापौर कार्यकाल से अब तक जारी है लड़ाई
पूर्व महापौर रेड्डी ने बताया कि वे अपने महापौर कार्यकाल से ही इस मुद्दे को लेकर लगातार संघर्ष कर रहे हैं। अपने कार्यकाल में उन्होंने न केवल कोयला क्षेत्रों की उपयोग हो चुकी जमीनों का राजस्व सर्वे करवाकर सरकारी रिकॉर्ड में दर्ज करवाया, बल्कि उन पर बसे नागरिकों को शासकीय योजनाओं से जोड़ते हुए प्रधानमंत्री आवास योजना के लाभ तक पहुँचाया। उन्होंने कहा, “यह शहर दशकों से बसा है, लेकिन अब तक पट्टा नहीं मिलने के कारण लोग अपने ही घर में असुरक्षा महसूस करते हैं।”
एसईसीएल की 2.94 हेक्टेयर जमीन वापसी का प्रस्ताव अब तक लंबित
रेड्डी ने बताया कि एसईसीएल चिरमिरी क्षेत्र की 2.94 हेक्टेयर जमीन, जो कोयला खनन के बाद अनुपयोगी हो चुकी है, उसे चिन्हित कर शासन को वापस करने का प्रस्ताव कलेक्टर कार्यालय को भेजा गया था। परंतु यह प्रस्ताव वर्षों से जिला स्तर पर लंबित पड़ा हुआ है। उन्होंने मांग की कि इस प्रस्ताव पर शीघ्र कार्यवाही कर चिरमिरी के नागरिकों को राहत दी जाए।
सरगुजा विकास प्राधिकरण व मुख्यमंत्री स्तर पर हुई थी सहमति
पूर्व महापौर ने याद दिलाया कि इस विषय पर 03 जून 2019 को सरगुजा क्षेत्र एवं आदिवासी विकास प्राधिकरण की बैठक में मुख्यमंत्री भूपेश बघेल की अध्यक्षता में यह निर्णय लिया गया था कि एसईसीएल की अनुपयोगी जमीनें शासन को वापस कराई जाएँ। इसके तहत अम्बिकापुर से पत्र क्रमांक 1613/सविप्रा/2019-20 दिनांक 19 जून 2019 जारी हुआ था, जिसे कलेक्टर कोरिया को भेजा गया था।
हालांकि, उन्होंने खेद जताया कि इस पत्र पर पालन प्रतिवेदन आज तक नहीं भेजा गया है, जिससे यह पूरी प्रक्रिया कागजों में ही अटककर रह गई है।
पूर्व में हुई उच्च स्तरीय बैठकें, पर कार्रवाई ठप
रेड्डी ने बताया कि 09 अगस्त 2017 को तत्कालीन मुख्यमंत्री के निर्देश पर चिरमिरी के तानसेन भवन में सम्भाग आयुक्त की अध्यक्षता में एक उच्च स्तरीय बैठक हुई थी, जिसमें मंत्री, विधायक, एसईसीएल सीएमडी और जिला प्रशासन के अधिकारी शामिल हुए थे।
उस बैठक के बाद 8 अधिकारियों की जिला स्तरीय समिति गठित कर रिपोर्ट तैयार की गई थी, परंतु मॉनिटरिंग के अभाव में कार्यवाही ठप पड़ी है।
‘यह राजनीति नहीं, शहर के अस्तित्व की लड़ाई है’ — रेड्डी
रेड्डी ने कहा कि यह किसी राजनीतिक स्वार्थ का मुद्दा नहीं है, बल्कि चिरमिरी और इसी तरह के कोयला शहरों के अस्तित्व और पलायन से जुड़ा गंभीर सामाजिक प्रश्न है। उन्होंने कहा —
> “यदि समय रहते शासन और प्रशासन ने गंभीरता नहीं दिखाई तो चिरमिरी जैसे शहर, जो कभी कोयले की रौनक से चमकते थे, धीरे-धीरे उजड़ जाएंगे। हम यह लड़ाई अपने शहर के भविष्य और यहाँ के नागरिकों के अधिकारों के लिए लड़ रहे हैं।”
विशेष टास्क फोर्स गठित करने की माँग
पूर्व महापौर ने कलेक्टर से आग्रह किया है कि इस विषय पर एक विशेष टास्क फोर्स गठित की जाए, जो एसईसीएल से संबंधित भूमि वापसी और पट्टा वितरण की लंबित कार्यवाही को शीघ्र गति दे।
उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री और शासन स्तर पर पहले ही सहमति बन चुकी है, अब केवल जिला प्रशासन की सक्रिय पहल से यह कार्य पूरा हो सकता है।
चिरमिरी वासियों की उम्मीद अब जिला प्रशासन से
चिरमिरी के नागरिकों की वर्षों पुरानी यह माँग अब एक बार फिर से चर्चा में है। पूर्व महापौर की यह निरंतर पहल शहर के लोगों में उम्मीद जगाती है कि शायद इस बार प्रशासन ठोस कदम उठाए और चिरमिरी के हजारों परिवारों को उनके घरों का मालिकाना हक मिल सके।
![]()
