ग्रामीण सड़क बदहाली से त्रस्त जनजीवन, तीन पंचायतों के लोग हलकान।
MCB
मनेन्द्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर जिले के जनपद पंचायत मनेन्द्रगढ़ अंतर्गत ग्राम पंचायत बिहारपुर के आश्रित ग्राम छरछा, बिहारपुर और बाला पंचायत सोनहरी पंचायत को जोड़ने वाली मुख्य सड़क की हालत दिनोंदिन बदतर होती जा रही है। यह सड़क तीनों पंचायतों की जीवनरेखा कही जाती है, लेकिन वर्षों से मरम्मत और निर्माण कार्य नहीं होने के कारण आज यह मार्ग पूरी तरह जर्जर हो चुका है।

बरसात ने बिगाड़ा हाल, गड्ढों में समा रही सड़क
बरसात के दिनों में सड़क पर बड़े-बड़े गड्ढे बन गए हैं। इन गड्ढों में पानी भर जाने से ग्रामीणों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। दोपहिया वाहन चालकों की आए दिन दुर्घटनाएं हो रही हैं, वहीं मरीजों को अस्पताल ले जाना और बच्चों का स्कूल पहुँचना किसी चुनौती से कम नहीं रह गया है। किसान भी अपने खेतों तक आसानी से नहीं पहुँच पा रहे हैं।
छरछा मार्ग पूरी तरह ध्वस्त, ग्रामीणों की मुश्किलें बढ़ीं
विशेषकर बिहारपुर पंचायत के आश्रित ग्राम छरछा का मार्ग पूरी तरह से कट चुका है। यही सड़क बिहारपुर, बाला और सोनहरी पंचायत को जोड़ती है, जहाँ आवागमन का दबाव बहुत अधिक है। हाई स्कूल जाने वाले बच्चों को सबसे ज्यादा परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। उन्हें महादेवापुर-गरुडोल होकर लगभग 12 किलोमीटर की लंबी दूरी तय करनी पड़ती है, जबकि बिहारपुर-छरछा मार्ग से केवल 5 किलोमीटर का सफर था।

अधूरा वादा और अधर में विकास
ग्रामीणों ने याद दिलाया कि पूर्व विधायक गुलाब कमरों ने अपने कार्यकाल में इस सड़क पर दो पुलिया का निर्माण कराया था और पूरी सड़क को बजट में शामिल करवाया था, लेकिन कांग्रेस सरकार के जाने के बाद इस सड़क का भविष्य अंधकार में चला गया। ग्रामीणों का सवाल है कि आखिर बजट में शामिल सड़क अचानक गायब कैसे हो गई?
प्रशासन और जनप्रतिनिधियों पर उठे सवाल
स्थानीय लोगों का कहना है कि उन्होंने कई बार प्रशासन और जनप्रतिनिधियों से इस समस्या के समाधान की गुहार लगाई, लेकिन अब तक किसी भी स्तर पर ठोस पहल नहीं हुई। ग्रामीणों ने सरकार से इस महत्वपूर्ण सड़क को प्राथमिकता में लेकर तत्काल निर्माण कराने की मांग की है।
ग्रामीणों की चेतावनी
ग्रामीणों का कहना है कि यदि जल्द ही सड़क निर्माण कार्य प्रारंभ नहीं हुआ तो वे आंदोलन करने को मजबूर होंगे। उनका कहना है कि सरकार और प्रशासन की अनदेखी ने उनके जनजीवन को संकट में डाल दिया है, अब उनकी निगाहें जिला प्रशासन और जनपद पंचायत पर टिकी हैं कि आखिर कब इस गंभीर समस्या का समाधान होगा।
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