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भूपेंद्र क्लब की भूमि से हटाए गए दुकानदार, नगर पालिका के लगा रहे चक्कर–
जिला व नगरीय प्रशासन समाधान की मांग
मनेंद्रगढ़।
नगरपालिका और जिला प्रशासन की बेरुखी से परेशान व्यापारी इस समय भारी संकट का सामना कर रहे हैं। भूपेंद्र क्लब के सामने स्थित भूमि पर वर्षों से छोटे-छोटे व्यवसाय करने वाले व्यापारियों को अचानक बेदखल कर दिया गया। बेदखल होने के बाद व्यापारी अपने व्यवसाय की जगह तलाशने के लिए दर-दर भटक रहे हैं, लेकिन नगर पालिका और प्रशासन से कोई ठोस जवाब नहीं मिल रहा है।

दुकानदार बेघर, व्यवसाय ठप
व्यवसाय कर रहे लोगों ने बताया कि उन्हें बिना किसी वैकल्पिक व्यवस्था के जमीन खाली करने का नोटिस थमा दिया गया। इसके बाद से व्यापारी मजबूर होकर अपने घरों से ही व्यवसाय चला रहे हैं। कुछ ने अपने घर के आंगन में दुकान सजा ली है तो कुछ गली-मोहल्लों में अस्थायी ठेला लगाकर किसी तरह रोजी-रोटी कमा रहे हैं।
प्रशासन की चुप्पी पर सवाल
व्यापारियों का आरोप है कि प्रशासन न तो वैकल्पिक भूमि उपलब्ध करा रहा है और न ही इस समस्या पर कोई सुनवाई कर रहा है। जिन दुकानों को तोड़ा गया, वहां पर अब वाहन खड़े किए जा रहे हैं और जमीन खाली पड़ी है। ऐसे में प्रश्न उठता है कि आखिरकार बेदखली की कार्रवाई का उद्देश्य क्या था?
आजीविका पर संकट
व्यापारियों का कहना है कि अचानक हुए इस कदम से उनका रोज़गार छिन गया है। पहले जहां वे अपनी दुकान चलाकर परिवार का पालन-पोषण कर पाते थे, अब घर से काम करने के कारण ग्राहकों की संख्या बेहद कम हो गई है। इससे आर्थिक स्थिति पर गहरा असर पड़ा है।
समाधान की मांग
व्यापारियों ने नगर पालिका और जिला प्रशासन से मांग की है कि उन्हें वैकल्पिक स्थान उपलब्ध कराया जाए ताकि वे सम्मानजनक ढंग से अपना व्यवसाय कर सकें।
स्थानीय लोगों में नाराज़गी
इस पूरे प्रकरण से आम नागरिक भी नाराज हैं। उनका कहना है कि वर्षों से उसी स्थान पर दुकानें चल रही थीं, जिससे आसपास की जरूरतें भी पूरी होती थीं। अब व्यापारियों के उजड़ने से न केवल उनकी जीविका पर असर पड़ा है बल्कि स्थानीय लोगों को भी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
भूपेंद्र क्लब की भूमि से बेदखल किए गए व्यापारी अब रोज़गार के संकट से जूझ रहे हैं। प्रशासन की चुप्पी और उदासीन रवैया इस समस्या को और गंभीर बना रहा है। लोग सवाल उठा रहे हैं कि आखिर बिना वैकल्पिक व्यवस्था के अचानक की गई बेदखली न्यायसंगत है या नहीं।
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